Hindi Shayri by alpprashant : 111327871

शार्द के इस मौसम में क्यों फिरते हो तुम बेखबर
अपनी न सही, कुछ मेरी तो कर लो तुम फ़िकर

©"अल्प" प्रशांत
Prashant Panchal

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