Hindi Shayri by alpprashant : 111294060

तेरे लिखे हर अल्फाज़ को हम बार बार पढ़ते है
तुझसे मुलाक़ात की ख्वाइश को बरकरार रखते है

©"अल्प" प्रशांत
Prashant Panc

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