Hindi Shayri by alpprashant

इन क़ातिल निगाहों की कसम, डूब जाएंगे हम
हल्का सा मुस्कुरा दो तुम, तुम्हे रब मानेगें हम

©"अल्प" प्रशांत
Prashant Pancha

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