Free Hindi Poem Quotes by सनातनी_जितेंद्र मन | 111759081

कलम ये मारती है, की तन्हाई पुकारती है.....
नहीं दिल पिघलता उसका, पत्थर सी आढ़ती है।
न खैरियत थी पूंछती, हो खब्त आंख भ

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