Hindi Microfiction by Falguni Shah

धूप का एक टुकड़ा
अक्सर संजोकर रखती हैं
वो अपने पल्लू में लपेटकर
पता नहीं कब
अपने आंसूओं की भाप से
समझौता

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Priyan Sri 2 month ago

अद्भुत 👏 👏

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