Hindi Thought by Kirtipalsinh Gohil : 111609537

दीपावली;
दीपों से मनाए, पटाखों से नहीं।
जरा एकबार उन बेजुबान पंछियों के बारे में सोच लीजिएगा की यह वक्त उनके आरा

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