Hindi Shayri by Shaba Shaikh : 111587922

*दूर थे ज़िस्म से, पर दिल से जुदा थोड़ी थे,*
*वो ख़फ़ा हमसे थे, हम उनसे ख़फ़ा थोड़ी थे.*

*किस तरह करते भला ख़्वाहिश

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