Hindi Shayri by Dinkal

मैंने देखा ही नहीं अपनी हथेलियों में,
तेरे नाम की लकीर ही नहीं थी,
बेशूमार मोहब्बत कर बैठे तुझसे,
पता ही ना चल

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Dinkal 7 month ago

शुक्रिया

shekhar kharadi Idriya 7 month ago

बोहोत खूब..

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