कोइ भीड़ मे भि तन्हा दिख रहा हे...यहाँ
कोइ खुद मे हि महेफ़िल सजाये बेठा हे...
तबाहि का इल्जाम जाम को मत् दो... यारो
कोइ बिना पिये हि यहा सब गवाए बेठा हे..
Bhumi polara

Hindi Shayri by Bhumi Polara : 111557224

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