Hindi Poem by Saroj Verma

अंज़ाम..!!

वो महफ़िल में आए कुछ इस तरह
जैसे अंधेरे में जल उठे हों चिराग़ कई

देखीं जो झुकती हुई निगाहें उनक

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Prem Nhr 8 month ago

अत्युत्तम

shekhar kharadi Idriya 8 month ago

अत्यंत सुंदर सृजन..

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