Hindi Poem by Prem_222 : 111458475

Prem_222:

नसीब के आगे हमे घुटने टेकने पडे l
ना और कोई रास्ता बचा था,
ना और कोई मंजिल बची थी,
थी तो सिर्फ तेरी याद ब

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Prem_222 3 month ago

https://www.matrubharti.com/bites/111464787 पहली बारिश का शेर लिखो सब अपना अपना बनाया हुआ..

Prem_222 4 month ago

Aabhar to all.. 🙏🙏🙏

Chhaya Makwana 4 month ago

Suparb yaar.....😊👍

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