Hindi Shayri by Shubham Tandia : 111438119

कहाँ कोई साथ होता है आख़िरी सफ़र के आख़िरी मोड़ तक, कोई साथ हो ये उम्मीद भी फालतू है। अच्छा यही है कि रह-गुज़र से मोहब्बत कर

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