Free Hindi Poem Quotes by Shirish Sharma | 111437820

ये ना समझना कि अनजान हूँ तुम्हारे घर से
तुम्हारे घर का हर शीशा अल्हड़पन है मेरा जो तुम्हे सारा दिन छेड़ता है
फर्श

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