Hindi Poem by Mohit Trendster

शहर के पेड़ से उदास लगते हो...(नज़्म)

दबी जुबां में सही अपनी बात कहो,
सहते तो सब हैं...
...इसमें क्या नई बात भला!
जो

read more

View More   Hindi Poem | Hindi Stories