Hindi Good Evening by Suryakant Majalkar

पौंधा तो मैंने भी लगाया था प्यार का।
मगर उसपे नफ़रत के फुल खिलें।
शायद दिलसे परवरीश नहीं की, वरना पत्थर पे भी फ़ुल

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