Hindi Shayri by MB Publication : 111308653

इक ख़ौफ़ सा छाया हुआ दिल पर क्यूँ है।
ये मेरे शहर का बिगड़ा हुआ मंज़र क्यूँ है।
اک خوف سا چھایا ہوا دل پر کیوں ہے.
یہ مرے شہر کا بگڑا

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