Hindi Shayri by Poorav : 111297667

गहरी थी रात पर हम खोए ही नहीं , दर्द बहुत था दिल में पर हम रोए ही नहीं . . . कोई नहीं हमारा जो पुछे हमसे , जाग रहे हो किसी के

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