Tumhare Baad - 1 by Pranava Bharti in Hindi Poems PDF

तुम्हारे बाद - 1

by Pranava Bharti Matrubharti Verified in Hindi Poems

1 ---- दिल के दरवाज़े पे साँकल जो लगा रखी थीउसकी झिर्री से कभी ताक़ लिया करती थीवो जो परिंदों की गुटरगूं सुनाई देती थीउसकी आवाजों को ही माप लिया करती थीन जाने गुम सी हो गईं हैं ये ...Read More