तुमसे ही जन्मा है मन में
आजादी का ख्वाब नया
तुमसे ही समजा है मन को
अस्तित्व का मोल मेरे
तुमही मेरी रोशनी
तुमही मेरी वीरश्री

हर नारी को नारी शक्ती से
तुम अवगत करवाती हो
हर नारी के रूके पैर को
तुमही आगे बढ़ाती हो
तुमही मेरी रोशनी
तुमही झाँसी की रानी लक्ष्मी

जखड़ रहीं मर्यादा ओं से
तु मुक्त मुझे करवाती हो
नारी को सम्मान सभी से
तेरे नाम से ही तो मिलता है
तुमही मेरी रोशनी
तुमही झाँसी की रानी लक्ष्मी

आत्मसम्मान का बीज मन में
तुमसे ही तो जागा है
ड़र को ड़राके उपर उठ़ना
तुमही तो रोज सीखाती हो
तुमही मेरी रोशनी
तुमही झाँसी की रानी लक्ष्मी

बाधाओं से आँख मिलाकर
लढ़ना तुम सीखाती हो
अंतिम सांस तक अड़े रहने कि
हिम्मत तुमही तो भरती हो
तुमही मेरी रोशनी
तुमही झाँसी की रानी लक्ष्मी

तेरे कारण नारी होने का
गम नहीं कभी लगता है
ऐसे ही मन में रहना तुम
तुमसे ही जीना में सीखती हूं ।

Hindi Poem by prajakta panari : 111813223

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