Free Hindi Shayri Quotes by Krunalmore | 111665520

हसी जो मुस्कुराते हुए छुटी थी
हर रात उसके बाद रूठी थी
हक नही अब सपनो पर भी,
जब नींद आँखो से टूटी थी

-Krunalmore

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