Hindi Blog by मनिष कुमार मित्र"

कुछ बातें पैसों (धन) की....

पैसों की कमाल देखो...

वंदनीय एवं ज्ञानी होने पर भी बिना पैसे अवहेलना होती है।
पैस

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मनिष कुमार मित्र" 1 month ago

शेखर जी इस उत्कृष्ट एवं यथार्थ समीक्षा देने के लिए आपका आभार प्रकट करता हूं धन्यवाद 🙏

shekhar kharadi Idriya 1 month ago

यथार्थ निरूपण क्योंकि पैसों का तो सब खेल है, यहां इंसान पैसों के पीछे मरते दम तक भागता रहता है, न अच्छा या बुरा देखता है, न पद की गरिमा देखता है, न गरीब का झोपड़ा देखता है, न आर्थिक स्थिति देखता है बस पैसों को हड़पना जानता है । अनगिनत भ्रष्टाचार या घोटाला करके अपने जैंबे भरने ही जानता है... धन्यवाद 💐👏

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