Hindi Shayri by શિતલ માલાણી

अंजान रिश्तों से लगाव अच्छा कहां ए दिल !

मंजिल मिल जाये तो हमसफर का हाथ भी छोड़ना गवारा है सभी को !

-શિતલ માલા

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