Hindi Shayri by શિતલ માલાણી

कोरे कागज की यही कहानी
फटे वहा से जहा मोड़ दिया ।
समज लो यही जिंदगानी
तुटे वहा से जहा छोड़
दिया ।

-શિતલ મ

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