Hindi Poem by TheUntoldKafiiya

•ख़ामोशीया

कुछ शोर हैं शेर-ओ-शायरी में हर ग़ज़ल का मतला रोता क्यूँ हैं..?
अरे बाकायदा तुम तो जाँ हों मिसरे की मौत स

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