Hindi Poem by TheUntoldKafiiya : 111613363

•जज़्बात

कुछ जज़्बात हैं कि आंखों से छलकने लगे हैं..,
नाम सुनकर ख़याल-ए-गुलज़ार बहकने लगे हैं..!

बे इब्ब्तिला ग़

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