Hindi Poem by Khyati Soni ladu : 111612136

महेक मिट्टीकी- कैसे भूलूँ!!

महेक मेरे शहर की,
कैसे भूली जाएगी?

दूर दरियापार भी,
साँसोंमें है समाई सी।

read more

View More   Hindi Poem | Hindi Stories