Hindi Poem by Mugdha : 111605044

पिछला एक बरस कुछ गुजरा ऐसे
सबने खोये कई स्वजन और परिजन जैसे
मृत्यु है निश्चित ये तो सब जानते थे वैसे
फिर भी, म

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Raj 2 month ago

Nice Mugdha ji

shekhar kharadi Idariya 3 month ago

अति सुंदर

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