Hindi Shayri by Dinkal

जो ना बन सके में वो बात हूं,
जो ना ख़त्म हो में वो रात हूं,
ना किसिके दिल की हूं आरज़ू,
ना किसीकी नज़र की हूं जुस्

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Asmita Ranpura 7 month ago

क्या बात ... वाह!! आपने तो वो गीत याद दिला दिया.....है इसी में प्यार कि आबरू...

Dinkal 7 month ago

शुक्रिया आपका

shekhar kharadi Idriya 7 month ago

क्या बात है बोहोत खूब..

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