Hindi Poem by Hiren Bhatt : 111578264

लगी है धुन मनमें मेरे
कब मिलेंगे बिछड़े सजन मेरे
देखती रहेती हर पल
अब शाम-सबेरे
आएँगे साजन कब
घर को मेरे
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