Hindi Shayri by शोभा मानवटकर

*कब तक यूं शामें ऐसें हीं
​धुंधलीं सीं देखा करें हम
​आ भीं जाओं ना यादों से निकलकर...
​यादों में जीतें-जीतें उब

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शोभा मानवटकर 6 month ago

धन्यवाद...👍👍

शोभा मानवटकर 6 month ago

धन्यवाद...👍👍

Ramesh Parmar 6 month ago

हदयस्पर्शी

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