Hindi Shayri by Dinkal

ढलती हुई ये शाम भी कुछ मदहोश नज़र आ रही है,
मानो जैसे चांद को अपनी बाहों में समेटने के लिए बेसबर हो रही है...💝

shekhar kharadi Idriya 7 month ago

अत्यंत सुंदर.. क्योंकि वो दृश्य ही दृष्टि में इतना खूबसूरत होता है

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