Hindi Shayri by Krunalmore : 111518224

अब सपनोको एक और दफा ओढा नही जाता,
गम तूटने का मंज़र मोड़ा नहीं जाता,
सोचा छोटी ही सही पर ख़ुशी लिख दूं,
दर्द शायर

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