Hindi Shayri by Nimisha : 111496145

रुह खूबसूरत थी ग़म के समंदर में डूब गई
जिस्म की खूबसूरती नीलाम होती रही
कोसती रही वो माँ अपने आप को
जिसकी बेटी

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Nimisha 4 month ago

शुक्रिया 🙏

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