Hindi Shayri by Raje. : 111485128

कोहराम-कत्लेआम मचा रखा है।
और सरेआम मचा रखा है।
जरा संभल के मेरे बेटे,
मै महोब्बत है।
इसने हर इल्जाम अपने सर

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