Hindi Poem status by Trisha R S on 15-Jun-2020 09:44pm

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Trisha R S 2 month ago

डब-डबी नयन में सिल छुपाये तन का प्रारम्भ कहा से करें क्षमा याचना मन का अनुताप करू तो जीवन हो जाये हल्का कहते ही उस प्रेयसी के नयनो से अश्रु छलका भ्रामक विचार क्या कर सकता था घाती मन मेरा ही बन बैठा था अपराधी अपने कर्मों की हूँ मैं केवल भागी खुद को दूर किया तुझसे मुझसा कौन अभागी ना जान सकी थी सत्य प्रेम नाश्वर है भौतिकवादी कर्म किया है ऐसा बन बैठी हूँ मैं वादी मन तड़फ-तड़फ आज हुआ है आधा मैंने भंग किया था नारी का मर्यादा जो किया कर्म ऐसा जाने कैसी थी ओ व्याधा सत्य जान आज जीवन ये तुझ

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