Hindi Poem by Suman Lata Singh : 111470919

एक थी कोमल कली जोअचानक,
निर्दयी के हाथ मे थी आ फँसी
मन मे सहमी और डरी फिर,
भाग्य से कुछ प्रश्न भी करती रही।
क्

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Rajneesh Kumar Singh 5 month ago

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

shekhar kharadi Idariya 5 month ago

अत्यंत सुंदर अभिव्यक्ति...

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