Hindi Shayri by Shubhendu Bhushan Tripathi : 111470194

अक्सर रातो में खुद से पूछता हूं,

क्यों उसने कुछ न कहा,

प्यार जो था तेरे मेरे दरमिया,

अब बाकी क्यों न रहा

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