Hindi Poem by Urvashi Trivedi : 111439232

कल किसने देखा है,
अपने आज मे खुश रहो,
खुशियों का इंतजार किस लिए,
दुसरो की मुस्कान मे खुश रहो,
क्यूँ तडपते हो ह

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