Hindi Poem by Bhuwan Pande : 111431050

दिल की भाषा
पढ़ने, लिखने और
बोलने के लिए

नहीं दाखिला चाहिए
किसी पाठशाला में

नहीं याद करनी पड़ती है read more

Shiv Sagar Shah 4 month ago

बहुत अच्छा