Hindi Poem by Riddhi Shah Mehta : 111374628

वक्त को काटना मत
उसे जीना!
खत्म हो जाएगा समंदर
उसे बूंद-बूंद पीना!
मेलों में है भीड़ बहुत
तुम हरगिज़ न खोन

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