Hindi Shayri by jaydev singh : 111329748

नीलाम कुछ इस कदर हुए,
बाज़ार ए वफ़ा में हम आज,
बोली लगाने वाले भी वो ही थे,
जो कभी झोली फैला कर माँगा करते थे!
"जय"

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