Hindi Shayri by Deepak Tokalwad : 111323587

दिल को बिठा दिया पतंग में
छोड दिया खुले आसमान में
पर दिल क्या मालुम?
उसे तोडने के लिए दुसरी पतंगे
करती है स

read more

View More   Hindi Shayri | Hindi Stories