Hindi Poem by Saroj Prajapati : 111318345

मधुर मिलन
विरह की अग्नि में तड़प रही विरहन को
लौट प्रियतम ने आलिंगनबद्ध कर उर लगाया
तृप्त हुई आत्माएं, नैनों

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Saroj Prajapati 9 month ago

शुक्रिया 😊🙏

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