Hindi Shayri by alpprashant : 111314483

हरबार मन मेरे तुझे नाराज़ ही किया है
फ़िर भी हर रिश्ता बख़ूबी ही निभाया है

©"अल्प" प्रशांत
Prashant Panchal
२४.१२.२०

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