Hindi Shayri by Poorav : 111282856

थोड़ा सा थक जाता हूं मैं इसीलिए दूर निकलना छोड़ दिया है पर ऐसा नहीं है कि अब मैंने चलना छोड़ दिया है फासले अक्सर रिश्

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