Hindi Poem by Pranjali Awasthi : 111275622

मैं "मौन" हूँ
जो कभी व्यर्थ नहीं जाता
बस्तियों में उजाला ही रहे हरदम
ऐसा कहाँ होता है
अंधेरा होते ही सब आवा

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