Hindi Poem by Rashmi Ravija

"उम्र की सांझ का बीहड़ अकेलापन "



जाने क्यूँ ,सबके बीच भी अकेला सा लगता है.

रही हैं घूर,सभी नज़रें मुझे
<

read more
Usha Kiran 9 month ago

बहुत खूब 👌

View More   Hindi Poem | Hindi Stories