Hindi Poem by Chirag

#kavyotsav2



‘ बचपन खो रही थी ‘



जा रहा था घर, शाम बाह़े खोल रही थी,

दिन

read more
Chirag 2 year ago

Great one ...thanks

Rj Krish 2 year ago

आँखें सबकी है खुली फिर भी जनता सो गई जिंदा है इंसान पर इंसानियत सबकी सो गई अल्हड़ सपनों में खोई एक नन्ही चिड़िया सो गई फुटपाथ की खुली राहों में देखो एक नन्ही बिटिया खो गई

View More   Hindi Poem | Hindi Stories